by Prachi Karnik | Feb 14, 2026 | Uncategorized

गुरुचरणाची
आस लागियेली
निशीदिनी स्मरली
सद्गुरू माऊली
सद्गुरू माऊली
कृपावंत व्हावे
दर्शन घडावे
मज पामरासी
मज पामरासी
भवाब्धी तरावे
मस्तकी ठेवावे
वरदहस्त
वरदहस्ते
असे घडवावे
न्हाउनी निघावे
आनंदाचे डोही
आनंदाचे डोही
शुचिर्भूत व्हावे
एक संघ व्हावे
मन चित्त बुद्धी
मन चित्त बुद्धी
एकवटो यावे
उदास वाटावे
ध्यान इतराचे
ध्यान इतराचे
समूळ गळावे
अंतरी वळावे
वृत्तीच्या धारा
वृत्तीच्या धारा
डोही मिसळावे
आनंदची व्हावे
सबाह्य-अंतरी
सबाह्य-अंतरी
द्वैत न रहावे
तादात्म्य पावावे
गुरुचरणाशी
by Prachi Karnik | Jan 11, 2026 | Uncategorized

श्री गुरु माझे ज्ञानराज महाराज।
सद्गुरू माझे ज्ञानराज महाराज।।
बहु सुखकारक, तिमिर विदारक।
लज्जित भासे व्योमराज।।
रूप सगुण धर, बोधक, गोचर।
प्राप्त सहज गुरुराज।।
निज प्रिय भक्तांसि दर्शवी अव्यक्तासी।
भजवूनि व्यक्त प्रभूराज।।
by Prachi Karnik | Jul 12, 2025 | Uncategorized

धन्य मी जाहले गुरु गवसला
सार्थकी आला सकळ जन्म
धन्य मी जाहले गुरु पाहियेला
देखोनी ह्या डोळा लाधले सुख
धन्य मी जाहले गुरु ऐकियेला
मनी उपजला मुमुक्ष भाव
धन्य मी जाहले गुरु जाणियेला
मार्ग सापडला चराचरा पार
धन्य मी जाहले गुरु तो नमिला
जळोनिया गेला अहंकार
by Prachi Karnik | Dec 4, 2024 | Uncategorized
मोरे महाराज, गुरुराज
मोरे सरकार
तुम मोरे तात, तुम भ्रात
तुम्ही आधार
तुमरे नाम से दिवस उजागर
तुम्हे सुमिरत हो सांझ
मोरे महाराज
तुमरो ध्यान धर मन होवे सुस्थिर
किरपा राखे मोरी लाज
मोरे महाराज
तुमरे दरस को आऊं नित द्वार
पदसेवा मिले काज
मोरे महाराज
तुमरी सीख से है भव-पथ सुंदर
अंत समय भी हो सहज
मोरे महाराज
by Prachi Karnik | Jul 22, 2024 | Uncategorized

गुरु द्वारे मैं फिर फिर आऊं
गुरु चरणों में गिर गिर जाऊं
गुरु जब मस्तक हस्तक धारे
तब लग जावे बेडा पारे
गुरु वाणी नित सुनत जाऊं मैं
गुरु मारग ही चुनत जाऊं मैं
गुरु जब दीप बने मोरे पथ को
छोर मिले मोरे जीवन रथ को
गुरु दरसन बिन व्यर्थ नयन हैं
गुरु सेवा बिन व्यर्थ जीवन है
गुरु के काज मो रत तन मन धन
सफल भये तब इह मनुज जनन
गुरु मिले, मोरे सद्भाग बडे हैं
गुरु संग मन-मती तार जुडे हैं
गुरुकृपा बरस रही नित निसदिन
थान न मेरो अब गुरु चरणन बिन
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