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गुरुमंत्र

गुरुमंत्र

एक राजा था। उसके राज्य में एक साधु रहा करता था। राज्य के अनेक लोग उस साधु के शिष्य बन गए थे। साधु की कीर्ति राजा तक पहुँची। राजा के मन में उस साधु से मिलने की इच्छा जागृत हुई और एक दिन राजा उस साधु के आश्रम में जा पहुँचा। राजा ने साधु को नमस्कार किया और कहा –...

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कां रे मना अल्लड धावसि तू

कां रे मना अल्लड धावसि तू

कां रे मना अल्लड धावसि तू टाळुनि गुरुच्या मार्गाला विसरुनि श्रीगुरु भजनाला वृथा रमसि भव नादी रे॥१ ॥   विषयांच्या नादात अडकुनी व्यर्थ दवडिसी जीवन हे गुरुचरणी तू लाग त्वरेंने जाय समुळ भवव्याधी रे॥२॥   मूढ मना किति सांगू आता धरि तू श्रीगुरु चरणा रे सिद्धज्ञान...

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मी मिथ्या जन बोली

मी मिथ्या जन बोली

श्री सद्गुरु सिद्धराज माणिकप्रभु महाराजांना ज्यांनी जवळून पाहिले आहे त्यांना माहित आहे कि महाराज बहुधा उघडपणे काही न बोलता संकेतानी आपला संदेश भक्तांना कळवायचे. सद्गुरूंनी उद्गारलेला प्रत्येक शब्द तर मोलाचा असतोच पण कधी-कधी न बोलता ते जे सांगतात त्यांनी आपला उद्धार...

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गुरुवाणी

गुरुवाणी

एक बार नारदजी की हनुमानजी से भेंट हुई। दोनों परम भक्त, दोनों ज्ञानी और दोनों अतीव बुद्धिमान्। कुशल-क्षेम के पश्चात् नारदजी ने अपने स्वभाव के अनुसार हनुमानजी को छेड़ना प्रारंभ कर दिया। नारदजी ने कहा - "हनुमान्! तुम निस्संदेह सर्वश्रेष्ठ भक्त हो, तुम्हारी भक्ति अनुपम...

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देवा तुझ्या दारी आलो

देवा तुझ्या दारी आलो

देवा तुझ्या दारी आलो, तुझ्या दर्शनासी। जीव झाला वेडा माझा तुला भेटण्यासी।। रूप तुझे रहावे सदा माझ्या अंतरात। जन्म माझा जावो सदा तुझ्या स्मरणांत।। मागतो मी देवा तुला एक वरदान। मुखी सदा राहो देवा तुझे गुणगान।। माया मोहाची ही बेडी तोडी भवबंध। तुझ्या चरणाची सेवा हाचि माझा...

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अधिकमास में गीता ज्ञानयज्ञ

अधिकमास में गीता ज्ञानयज्ञ

 १८ सितंबर से अधिकमास का आरंभ होने जा रहा है। कहा गया है अधिकस्य अधिकं फलम्‌ - अधिक मास के दौरान अधिक से अधिक समय जप-तप, अनुष्ठान में व्यतीत करने से हमारी साधना को विशेष बल मिलता है। गत कुछ दिनों से संस्थान के कार्यालय से संपर्क करके कईं भक्तजनों ने जानना चाहा कि आने...

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