Catagories

कीर्तिमुख

कीर्तिमुख

कईं मंदिरों के मुख्य द्वार पर आपने एक विक्राल राक्षस का चेहरा बना हुआ देखा होगा।  बड़ी-बड़ी भयानक आंखे, मुह के बाहर लटकती लंबी जीभ और टेढ़े-मेढ़े दांतों वाला यह चहरा बड़ा ही उग्र होता है। परंतु देवालयों के मुख्य द्वार पर भला राक्षस का क्या काम? हमारे मन में ऐसा प्रश्‍न...

read more
वो दिखा रहे हैं जल्वा …

वो दिखा रहे हैं जल्वा …

वो दिखा रहे हैं जल्वा चेहरा बदल बदल के। मरकज़ हैं वो अकेले सारी चहल-पहल के।। देखी जो शक्ल उनकी लगते हैं अपने जैसे। मिलने उन्हें चला है ये दिल उछल उछल के।। उनको गले लगाकर पहलू में बैठने को। बेताब हो रहा है दिल ये मचल मचल के।। शीशे में अक़्स अपना देखा वो दिख रहे हैं।...

read more
पं. जसराज और माणिकनगर

पं. जसराज और माणिकनगर

 (Video by Kiran Nerurkar) सन्‌ १९७६-७७ के फरवरी महीने की बात है। सुबह के लगभग ६ बज रहे थे। प्रभु मंदिर से किसी के गायन की आवज़ से श्रीज्ञानराज जी नींद से जागे और मंदिर के पहरेदार को बुलवाकर उससे उन्होंने पूछा कि, इतनी सुबह मंदिर में कौन गा रहा है? पहरेदार उस कलाकार...

read more
श्रीमनोहरप्रभु जयंती

श्रीमनोहरप्रभु जयंती

श्रीमनोहरप्रभु जयंती   कालयुक्तिनाम संवत्सर श्रावण अमावास्या 7 सितंबर 1858 का मंगलमय दिवस उदित हुआ और माणिकनगर की धरती सूर्य की पहली किरण के स्पर्श से पुलकित हो गई। वह दिन श्रावणमास उत्सव का अंतिम दिन था। घनघोर मेघों से ढका हुआ सूर्य माणिक नगर की धरती पर अवतरित...

read more
आरती श्रीमनोहरप्रभूंची

आरती श्रीमनोहरप्रभूंची

श्री मनोहर माणिकप्रभु महाराजांच्या १५८व्या जयंती निमित्त श्री ज्ञानराज माणिकप्रभूंची नूतन रचना आरती श्रीमनोहरप्रभूंची (चाल: आरती सगुण माणिकाची...) आरती सद्गुरुरायाची। मनोहरप्रभुच्या पायाची।।ध्रु.।। श्रोत्रियब्रह्मनिष्ठ त्यागी। स्वयं परिपूर्ण वीतरागी। ज्ञानविज्ञानतृप्त...

read more
श्री व्यंकम्मा देवी आराधना

श्री व्यंकम्मा देवी आराधना

श्री व्यंकम्मा देवी आराधना दुंदुभिनाम संवत्सर श्रावण कृष्णा त्रयोदशी शनिवार २३ अगस्त १८६२ भगवती व्यंकम्मा की आराधना संस्थान के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है। आज से 158 वर्ष पूर्व दुंदुभिनाम संवत्सर - श्रावण वद्य त्रयोदशी शनिवार 23 अगस्त 1862 को देवी व्यंकम्मा ने जिस...

read more