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क्रिकेट टूर्नामेंट का आरंभ

क्रिकेट टूर्नामेंट का आरंभ

आज माणिकनगर में प्रतिवार्षिक श्री सिद्धराज माणिकप्रभु क्रिकेट टूर्नामेंट का आरंभ हुआ। सुबह ८:३० बजे सिद्धराज क्रिकेट ग्राउंड में श्री आनंदराज जी ने ध्वजारोहण के साथ इस प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्राचार्या श्रीमती सुमंगला जागिरदार, श्री अब्दुल रेहमान तथा ग्राम पंचायत अभिवृद्धि अधिकारी श्री हणमंत सहित अनेक क्रीडा प्रेमी लोग क्रीड़ांगण में उपस्थित थे। उद्घाटन के समय बिगुल पर सलामी धुन ब

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श्रीमाणिक पौर्णिमा पर्व संपन्न हुआ

श्रीमाणिक पौर्णिमा पर्व संपन्न हुआ

इस वर्ष की शांकभरी पौर्णिमा के अवसर पर श्रीप्रभु के अनुग्रह से पुनश्च पौर्णिमा पर्व के कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। कल आयोजित सत्संग के कार्यक्रम में श्रीजी ने ‘हिंदू धर्म के १० आदेश’ इस विषय पर व्याख्यान किया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं ने इस मार्गदर्शन का लाभ लिया। जो भक्तजन इस कार्यक्रम में प्रत्यक्षरूप

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कर्नाटक ब्राह्मण अभिवृद्धि मंडल की सभा संपन्न

कर्नाटक ब्राह्मण अभिवृद्धि मंडल की सभा संपन्न

कर्नाटक ब्राह्मण अभिवृद्धि मंडल के अध्यक्ष श्री एच.एस. सच्चिदानंद मूर्ती जी का आज माणिकनगर में प्रभु दर्शनार्थ आगमन हुआ। प्रभु मंदिर में दर्शन एवं आशीर्वचन के पश्चात्‌ मूर्ती जी ने श्री माणिकप्रभु वेद पाठशाला परिसर में जाकर वहॉं उपस्थित विद्यार्थियों एवं अध्यापकों से बात-चीत की। वैदिक परंपरा एवं ब्राह्मण समाज

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माणिकनगर में ह.भ.प श्री गुरुबाबा औसेकर

माणिकनगर में ह.भ.प श्री गुरुबाबा औसेकर

मंगलवार ५ जनवरी को औसा संस्थान के ह.भ.प. श्री गुरु बाबा महाराज औसेकर प्रभु दर्शनार्थ माणिकनगर पधारे। प्रभु दर्शन के बाद श्रीगुरुबाबा, श्रीजी से मिले। महाराजश्री ने श्रीगुरु बाबा को प्रभु प्रसाद से अनुग्रहित किया। नाथ महाराज संस्थान औसा एवं श्रीप्रभु संस्थान के अत्यंत पुरातन संबंध हैं। श्रीप्रभुचरित्र में भी उल्लेख आया है, कि औसा मठ के तत्कालीन सत्पुरुष चिटगुप्पा में श्रीप्रभु से मिले थे।

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ज्ञानाकृति सच्चित्सुख प्रभु की

ज्ञानाकृति सच्चित्सुख प्रभु की

(कार्तिक कृ. सप्तमी - श्री सद्गुरु ज्ञानराज माणिकप्रभु महाराज की ६२वीं जयंती के उपलक्ष में) ज्ञानाकृति सच्चित्सुख प्रभु की प्राप्त हमें है सगुण सुलभ। पुण्य हुए हैं आज फलित जो मिला 'ज्ञान' आश्रय दुर्लभ।। ज्ञानपुंज सद्गुरू हमारे सच्चित्सुख औै ब्रह्मनिष्ठ। तव वाणी के ही...

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वन्दे गुरुपरंपराम्

वन्दे गुरुपरंपराम्

सद्रूपचिद्रूपसुखस्वरूपं तद्ब्रम्हवाच्यं परमात्मतत्वम् वन्देऽनसूयात्रिसुतं सुपूज्यं दत्ताभिधेयं गुरुराजमाद्यम् श्रीपादराजं गुरुषुद्वितीयं नृसिंहरूपं वरदं तृतीयम् श्रीमाणिकाख्यं यतिनं चतुर्थं श्रीभक्तकार्येषु कल्पद्रुमं तम् तत्पञ्चमं पूज्यमनोहराख्यं मार्तण्डनामानमपीह...

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