श्रीगुरु प्रतिपदा पर्व संपन्न
माघ कृष्ण प्रतिपदा का दत्त संप्रदाय में अनन्यसाधारण महत्व है। आज के परम पवित्र पर्व पर ही भगवान् श्री दत्तात्रेय के द्वितीय अवतार श्री नृसिंह सरस्वती स्वामी महाराज का श्रीशैल के अरण्य में निजानंद गमन हुआ था। माणिकनगर में प्रतिवर्ष गुरु प्रतिपदा के अवसर पर पूजा आदि...
हा चमत्कारच नव्हे काय?
अजून पंधरा दिवस आरामाची गरज असून ११ मार्च पर्यंत शक्यतो भेटायचे टाळावे असे नमूद करण्यात आले होते. काल सकाळी नित्यसेवा करताना मनांत श्रीजींच्या प्रवचनाचा विषय डोकावला. श्रीप्रभुला त्यांच्या दीर्घायुष्याबद्दल प्रार्थना करून ज्ञानदानाचा हा यज्ञ धडाडत रहाण्यासंदर्भात प्रार्थना केली होती. दुपारी प्रवचनाचा
श्री गुरु पौर्णिमा उत्सव
प्रतिपदा से एक दिन पूर्व माघ पौर्णिमा के दिन ब्रह्मचारी, श्रीप्रभु की झोली लेकर माणिकनगर ग्राम में भिक्षाटन करते हैं। वर्षभर में केवल इसी विशेष पर्व पर गांव के प्रत्येक घर से प्रभु की झोली भिक्षा स्वीकार करती है। इस पर्व पर साक्षात् प्रभु ही झोली लेकर हमारे घर भिक्षा के लिए पधारे हैं ऐसी भावना से माणिकनगर के सभी ग्रहस्थ अत्यंत आदर एवं भक्ति से अपने आंगन में दत्तप्रभु की झोली का स्वागत करते हैं। गांव की महिलाऍं आज के दिन झोली के स्वागत के लिए अपने-अपने घरों के आंगन को गोबर से लीपकर रंगोलियों एवं फूलों से सजाकर गलियों की शोभा बढाती हैं। विविध पुष्प-पल्लवों से और आम के तोरणों से सजे हुए घरों के सुंदर द्वार सर्वत्र उत्साह एवं आनंद की लहर को बिखेरते हैं। ब्रह्माचारी की पूजा- आरती संपन्न करने के बाद घर के यजमान श्रद्धायुक्त अंतःकरण से झोली में यथाशक्ति द्रव्य अ
आज का प्रवचन यूट्यूब पर देंखें
जय गुरु माणिक! आज गुरु पौर्णिमा के अवसर पर श्रीजी ने यूट्यूब वीडियो के माध्यम से भक्तजनों को संबोधित करते हुए ‘चमत्कार’ इस विषय पर प्रवचन किया। श्रीजी का यह प्रवचन यूट्यूब पर ‘माणिक प्रभु’ इस चैनल पर उपलब्ध है। यहॉं दिये हुए लिंक से भी आप वीडियो तक पहुँच सकते हैं। हम...
श्रीमत्कालाग्निरुद्र स्थापना पर्व
तभी श्रीजी ने व्यवस्थापकों को बताया, कि भंडारखाने के पीछे प्रभु मंदिर के निर्माण के समय से कुछ पत्थर पड़े हैं और उन शिलाओं में खोजने पर शायद किसी देवता की मूर्ति मिल जाए। श्रीजी की इस आज्ञानुसार जब उस स्थान पर पत्थरों के टीले को हटाया गया तो वहॉं काले पाषाण में तराशी हुई हनुमानजी की एक अत्यंत सुंदर मूर्ति मिली। इ. स. 1916 के माघ
आज दिपवाळी जन्मदिवस उगवला
भक्तापत्कुलनाशकं गुरुपदे मग्नं स्वबोधामृतैः ज्ञानानन्दकरं निजाश्रितनृणां विद्यान्नसन्तर्पिणम्। दीनार्तेषु कृपाकरं ह्यभयदं श्रीसिद्धराजं गुरुं माणिक्यप्रभुमाश्रयामि परमं शं नो भवेत्सर्वदा ।। श्री सद्गुरु सिद्धराज माणिकप्रभु महाराज की ८२वीं जयंती के अवसर पर आज शाम महा...






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