बेसन के लड्डू
महाराजश्री ने आश्चर्यपूर्वक पूछा ‘‘क्यों? इस बार बेसन के लड्डू नहीं हैं क्या?’’ इस पर मामीसाहेब ने सकुचाते हुए तथा घबराते हुए उत्तर दिया ‘‘आप लड्डू तो खाते ही नहीं हैं, इसलिए मैंने सोचा, बनाकर क्या ला…
योगी करिबसवेश्वर का विवेक
योगी करिबसवेश्वर का विवेक
सहस्र बिल्वार्चन सेवा
उसी प्रकार सत्त्व, रज एवं तम इन तीन गुणों का प्रतीक भी यह बिल्वदल है। अस्तु भक्तिपूर्वक एक बिल्वदल प्रभु को अर्पित करने के पीछे का भाव यह है कि, हे प्रभो मैं जागृति, स्वप्न सुषुप्ति; बाल्यावस्था, युवावस्था एवं वृद्धावस्था इन सभी अवस्थाओं में सर्वथा आपके चरणों में समर्पित रहूँगा। मैं सत्त्व, रज एवं तम इन तीनों गुणों में बरतता हुआ सदैव आपकी ही सेवा में रत रहूँगा। इस भावना के साथ जो बिल्वपत्र प्रभु को अर्पित करता है उसके योगक्षेम का समस्त उत्तरदायित्व श्री प्रभु स्वयं उठाते हैं, और इस
श्रीमाणिकप्रभु बाललीला
सायंकाळी कोणी एक वैश्यवाणी । व्यंकप्पा नामे आला कल्याणी । सत्य झाली माणिकप्रभुंची वाणी । पुत्रप्राप्ती म्हणोनि ॥७॥
Shreeji’s Visit to King Kothi
People were thronging to meet Shreeji. The Haveli and its compound were so full of people that even the Sadar Kotwal (Police Chief) – Sir Venkatramareddy had to wait in his car for hours before he could enter the compound. Suddenly, the telephone at the Haveli rang. The call was from King Kothi Palace. His Exalted Highness, the 7th Nizam had extended an invitation to Shreeji to come and bless him. Some people at the Haveli were anxious at the prospect of a Hindu saint visting the Muslim Prince. But Shreeji gladly accepted the invitation and asked Sir Kishan Pershad, the Diwan, to make arrangements for the visit.
The next day, Shreeji’s convoy left for King Kothi. Many Paigah Nawabs (aristocrats) and State officials were accompanying Shreeji. Shreeji alighted from his car at the stairs of Nazari Baagh Mahal (the residential wing of King Kothi Palace). The 7th Nizam Mir Osman A
वेदांत सप्ताह का सफल आयोजन
वाद्यों के पूजन के साथ अखण्ड प्रभुनामस्मरण का श्रीगणेश किया। दिनांक १ अप्रैल को श्री मार्तण्ड माणिक प्रभु महाराज की ८५ वीं पुण्यतिथि के अवसर पर महापूजा एवं आराधना-विधि अत्यंत भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। दिनांक २ अप्रैल को वेदांत सप्ताह उत्सवांगभूत दक्षिणा वितरण का कार्यक्रम यथाविधि संपन्न हुआ। संपूर्ण वेदांत सप्ताह महोत्सव में श्रीमद्भागवत पारायण, श्री माणिक चरितामृत पारायण, अखण्ड प्रभु नामस्मरण, बालगोपाल क्रीड़ा, विविध भक्त मण्डलियों द्वारा भजन तथा मुक्तद्वार अन्नदान के कार्यक्रम पिछले वर्षों से भी अधिक उल्लास के साथ सुचारु रूप से संपन्न हुए। वेदांत शिक्षा शिबिर के अंतर्गत श्रीजी ने श्रीमद्भगवद्गीता के ७ वे अध्याय पर व्याख्यान किया जिसको भक्तजनों की सुविधा के लिए फेसबुक व यू-ट्यूब पर अपलोड किया गया है। सायंकालीन सत्र में श्री ज्ञानराज माणिकप्रभु महारा






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